नाम में क्या रखा है
इंग्लिश के एक बड़े राइटर ने सदियों पहले लिखा है , नाम में क्या रखा है ! पर अगर आप हिन्दोस्तान, इंडिया, भारत जैसे देश में रखते है तो नाम में बहुत कुछ छुपा होता है |
मेरा नाम सैफी शाहिद है, वैसे इस ब्लॉग को पढ़ने वाले काफी लोग ये नाम सुन के थोड़ा हैरान होंगे की इस नाम में नाम क्या है और कास्ट क्या है | तो मैं अपने पढ़ने वालो को बता दू की मेरा नाम ही सैफी शाहिद है | इस नाम में ना ही कोई जाति है ना ही कोई ऐसा प्रतीक जो आप खोज रहे होंगे |
आज कहानी केवल मेरे नाम की है, मेरा नाम सैफी कैसे पड़ा ये तो कहानी थोड़ी लम्बी है, पर शाहिद मेरे नाम के आगे मेरे अब्बू के नाम जुड़ा हुआ है | उनका नाम शाहिद महमूद है, जिसका फिर से कोई भी लॉजिक नहीं है | मेरे नाम का जो सिंपल लॉजिक होगा वह है, मेरा नाम जो मेरे को दिया गया , और मेरे अब्बू का फर्स्ट नाम | मेरे नाम की ये तो सिंपल सी एक स्टोरी थी |
घर के सबसे छोटे बच्चे सबसे लाडले होते है, वैसे ही मैं भी था | मेरे नाम सैफी किसने रखा ये तो मैं आपको बता देता हो, मेरी बड़ी खाला ने ये नाम मेरे लिए चुना था | पर शायद उनको भी नहीं पता था की ये नाम "सैफी" नॉर्थ इंडिया में काफी ही फेमस है एक जाति की तरह | इंडिया के नॉएडा, मेरठ, गुरुर्ग्राम के आस पास के इलाको में ज्यादातर लोग जो कारपार्टनर का काम करते है और मुस्लिम होते है वह "सैफी" को अपने नाम के आगे लगते है | अब ऐसा क्यों है कब से है पता | इसका बी अपना एक अलग इतिहास होगा |
पर मेरी खाला जो सायद शायद कभी बी इलाहाबाद के बहार नहीं गयी थी, उसको इस बाद का इल्म नहीं था | तो उन्होंने हमारा नाम रख दिया, इलाहाबाद जीवन के २० साल तो मुझे इस नाम से काफी ख़ुशी रही की चलो हमारा नाम थोड़ा अलग है |
जब मैं नॉएडा और दिल्ली में रखना स्टार्ट करा तो मुझे सबसे पहले ये अहसास हुआ की ये नाम में कुछ तो है, सबने मेर नाम पे बिज़नेस खोल रखा है | इलाहाबाद में मेरे नाम का शायद है एक दो लोग थे, और उसमे भी मेरे घर वाले इलज़ाम लगा चुके थे की उन्होंने मेरे नाम चुराया है | पर यहाँ तो सब ने मेरे नाम पे बिज़नेस ही चला रखा है |
अब मेरे नाम में मुझे सबसे बड़ी दिक्कत समझ में आयी, तो जब मैं नाम बताता हूँ किसी को, तो लोग कंफ्यूज हो जाते है , की नाम क्या है और suraname क्या है | कुछ मुझे लकड़हारा भी समझ लेते है | ये समझाना लोगो को बहुत ह मुश्किल काम है की मेरे नाम में केवल नाम है और अब्बू की पहचान बस | ये शायद लोगो को समझ में नहीं आता है |
नाम में क्या रखा है मुझे तो नहीं पता , पर नाम पे बाकि लोगो को अपने जज करने के लिए काफी कुछ है
| फिर एक प्रश्न होता है मेरे मन में, की क्या मेरे बच्चे मेरे रखने हुए नाम को बड़े होकर पसद करेंगे ??
Comments
Post a Comment